सुरेश मालवीय, सीहोर। बुधनी विधानसभा की पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता साधना उइके ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा परम फाउंडेशन को प्रदेश की 16 शासकीय आदिवासी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) के हस्तांतरण की कार्यवाही का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि एकलव्य शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), चकलदी (सीहोर) सहित इन 16 संस्थानों को निजी संस्था के हवाले करने का निर्णय विद्यार्थियों और आदिवासी समाज के हितों के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि बिना व्यापक जनपरामर्श तथा विद्यार्थियों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और आदिवासी समाज की सहमति के सरकारी संस्थानों को निजी हाथों में सौंपने का प्रयास जनहित के विरुद्ध है। यह निर्णय आदिवासी युवाओं के शिक्षा के अधिकार, समान अवसर और रोजगार के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकारी आईटीआई का उद्देश्य गरीब, आदिवासी एवं ग्रामीण युवाओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि इन संस्थानों का संचालन परम फाउंडेशन जैसी निजी संस्था को सौंपा जाता है, तो शिक्षा का व्यवसायीकरण बढ़ेगा और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
इस अवसर पर उन्होंने एकलव्य शासकीय आईटीआई के विद्यार्थियों से संवाद किया। विद्यार्थियों ने बताया कि संस्थान के हस्तांतरण से उनके भविष्य, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, रोजगार के अवसर तथा शिक्षा की निरंतरता को लेकर गंभीर चिंताएँ हैं। विद्यार्थियों ने सरकार से परम फाउंडेशन को किए जा रहे हस्तांतरण के निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की।
उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की कि परम फाउंडेशन को 16 शासकीय आदिवासी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) के हस्तांतरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए तथा इन संस्थानों का संचालन पूर्णतः शासन के अधीन रखा जाए।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस जनविरोधी निर्णय को वापस नहीं लेती है, तो विद्यार्थियों, आदिवासी समाज एवं सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।
इस दौरान जिला पंचायत सदस्य विजेंद्र उइके, सामाजिक कार्यकर्ता फ़हीम भाई, संदीप जी, प्रदीप जी तथा एकलव्य शासकीय आईटीआई के बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में परम फाउंडेशन को किए जा रहे हस्तांतरण का विरोध करते हुए सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की।
मुख्य मांगें
- परम फाउंडेशन को 16 शासकीय आदिवासी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) के हस्तांतरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए।
- सरकारी तकनीकी शिक्षा को निजी हाथों में सौंपना बंद किया जाए।
- आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा की जाए।
- तकनीकी शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सरकारी निवेश बढ़ाया जाए।
सरकारी आईटीआई का निजीकरण बंद करो!
आदिवासी युवाओं का भविष्य सुरक्षित करो!