भोपाल
राजधानी भोपाल के रिहायशी इलाकों में वर्षों से संचालित अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू. नगर निगम ने पहले चरण में अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़िया कला के 429 दुकानों, कार्यालय, बैंकों और शोरूमों को नोटिस जारी किए हैं. नगर निगम ने कहा है कि 27 जुलाई तक वैध दस्तावेज प्रस्तुत करें. ऐसा नहीं करने पर नगर निगम भवनों को खाली कराकर तत्काल सील करेगा।
इस कार्रवाई से शहर के करीब 30 हजार कारोबारियों में हड़कंप है. नोटिस के विरोध में व्यापारी खुलकर सामने आ गए हैं. भोपाल चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज ने इस मामले में शनिवार को पत्रकार वार्ता कर नगर निगम की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
429 प्रतिष्ठानों को नोटिस, 27 जुलाई तक मौका
नगर निगम ने मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के तहत व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए हैं. इन नोटिसों में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा तक वैध अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं या फिर अवैध व्यावसायिक गतिविधियां बंद की जाएं. अन्यथा तय समय के बाद निगम बिना किसी अतिरिक्त सूचना के सीलिंग की कार्रवाई करेगा।
रिहायशी इलाकों में बन गए कमर्शियल हब
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के अनुसार “भोपाल के कई प्रमुख आवासीय क्षेत्र वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बन चुके हैं. अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कला, अशोका गार्डन, इंद्रपुरी, पिपलानी, कोलार रोड, 10 नंबर क्षेत्र और संत हिरदाराम नगर सहित कई इलाकों में बड़ी संख्या में दुकानें, कार्यालय, बैंक और शोरूम संचालित हो रहे हैं.” नगर निगम का कहना है कि इनमें से बड़ी संख्या ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जो नियमों के विपरीत रिहायशी भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
नोटिस का असर शुरू, छोटे कारोबार होने लगे बंद
नगर निगम की कार्रवाई का असर अब दिखाई देने लगा है. जिन क्षेत्रों में नोटिस जारी किए गए हैं, वहां कई छोटे कारोबारियों ने अपनी व्यावसायिक गतिविधियां बंद करना शुरू कर दिया है. वहीं अन्य प्रतिष्ठान वैध दस्तावेज जुटाने और नियमों के अनुरूप अनुमति लेने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में देनी है कार्रवाई की रिपोर्ट
नगर निगम के लिए यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 30 जुलाई तक उसे सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर यह बताना है कि आवासीय क्षेत्रों में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. इसके बाद 4 अगस्त को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई प्रस्तावित है. ऐसे में निगम पर भी कार्रवाई का दबाव बना हुआ है।
नगर निगम का अनुमान है कि शहर के विभिन्न रिहायशी इलाकों में करीब 30 हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठान नियमों के विरुद्ध संचालित हो रहे हैं यदि यह अभियान चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ता है, तो बड़ी संख्या में दुकानों, दफ्तरों और शोरूमों पर सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है. इससे हजारों कारोबारियों और भवन मालिकों की चिंता बढ़ गई है।
व्यापारी एकजुट, नगर निगम की कार्रवाई रोकने की मांग
व्यापारियों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के केवल 10 दिन में कारोबार बंद करने का आदेश हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है।
भोपाल चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने कहा “नगर निगम ने 17 जुलाई को नोटिस जारी कर व्यापारियों को 26 जुलाई तक व्यवसाय बंद करने या भवन को पूरी तरह आवासीय स्वरूप में बदलने के निर्देश दिए हैं. किसी भी व्यापारी के लिए मात्र 10 दिन में वर्षों से स्थापित कारोबार समेटना संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन
व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है. गोविंद गोयल के अनुसार “मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान में होने की बात कहते हुए विचार करने का आश्वासन दिया है. वहीं हेमंत खंडेलवाल ने भी व्यापारियों की बात सुनकर कलेक्टर और कमिश्नर से चर्चा करने का भरोसा दिलाया है।
मिक्स लैंड यूज़ नीति लागू करने की मांग
भोपाल चेंबर का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया, जिसके कारण शहर में पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड विकसित नहीं हो सके. इसी वजह से 10 नंबर मार्केट, अरेरा कालोनी, 11-12 नंबर, बावड़िया कला, रोहित नगर और अन्य क्षेत्रों में वर्षों से आवासीय परिसरों से व्यवसाय संचालित हो रहे हैं. व्यापारियों ने मांग की कि प्रमुख मार्गों और मुख्य सड़कों पर मिक्स लैंड यूज़ नीति लागू कर इन गतिविधियों को वैध किया जाए।
भोपाल चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया कि यदि नगर निगम की कार्रवाई नहीं रोकी गई तो व्यापारिक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी. व्यापारियों ने मांग की है कि नया मास्टर प्लान लागू होने या कोई व्यवहारिक समाधान निकलने तक सभी दंडात्मक कार्रवाई स्थगित की जाए, ताकि व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।