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क्या है रिंग ऑफ फायर? जानिए साल के पहले सूर्य ग्रहण की खासियत

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क्या है रिंग ऑफ फायर? जानिए साल के पहले सूर्य ग्रहण की खासियत
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सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर लगता है. कल यानी 17 फरवरी को फाल्गुन माह की अमावस्या मानाई जाएगी. साथ ही कल साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. सूर्य को ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा. ये वलयाकार सूर्य ग्रहण रहने वाला है. इसे विज्ञान अपनी भाषा में रिंग ऑफ फायर कहता है. ये सूर्य ग्रहण बहुत ही विशेष है.

ये सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आने वाला है और न ही इसका सूतक काल भारत में माना जाएगा, लेकिन लोगों के मन में सवाल है कि ये रिंग ऑफ फायर क्या है और ये सूर्य ग्रहण विशेष क्यों हैं?

क्या है रिंग ऑफ फायर?
NASA के अनुसार, जब धरती से चंद्रमा की दूरी सबसे अधिक होती है और उस दौरान सूर्य ग्रहण लगता है, तो चंद्रमा दूर होने की वजह से सूर्य को पूरी तरह से ढक पाने में असफल रहता है. इसलिए आकार में छोटा नजर आता है. ऐसे में सूर्य का बीच वाला भाग काला दिखता है और उसके चारों ओर रौशनी की पतली चमकदार घेरा बन जाता है. ये चमकदार घेरा आग की अंगूठी जैसा नजर आता है. इसे ही रिंग ऑफ फायर कहते हैं.

दूसरा, वलयाकार या कुंडलाकार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा और धरती एक सीध में होते हैं और चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है. इस स्थिति में सूर्य एक रिंग जैसा दिखने लगता है.

सूर्य ग्रहण क्यों है विशेष?
साल 2026 का ये सूर्य ग्रहण इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि ये शनि देव की राशि कुंभ में और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने वाला है. सूर्य के साथ-साथ इस राशि में राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी मौजूद रहने वाले हैं. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि सूर्य और राहु के एक साथ किसी राशि में रहने पर ग्रहण योग निर्मित होता है. कुंभ राशि में राहु और सूर्य की युति को परंपरागत तौर पर अशुभ माना जाता है.

कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण
भारतीय समय के अनुसार, सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर लगेगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर ये खत्म होगा. ये सूर्य ग्रहण कुल 04 घंटे 32 मिनट तक रहेगा.

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