कोटा। नौ महीने के लंबे इंतजार के बाद घोषित हुई कोटा शहर जिला कांग्रेस की नई कार्यकारिणी में मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कार्यकारिणी गठन के दूसरे दिन सचिव मन्नू मेघवाल के त्यागपत्र के बाद अब बुधवार को पार्टी में बगावत की आंच और तेज हो गई है। संगठन में डिमोशन से नाराज महासचिव बलविंदर सिंह बिल्लू सहित दो सचिवों—धर्मा गौचर और राजू पहाड़िया—ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। तीनों नेताओं ने अपने त्यागपत्र सीधे प्रदेश आलाकमान को भेजे हैं।
कार्यकारिणी के गठन के महज तीन दिनों के भीतर एक के बाद एक हुए चार इस्तीफों ने निकाय चुनावों से ठीक पहले शहर कांग्रेस की अंतर्कलह और गुटबाजी को उजागर कर दिया है।
‘चापलूसी करने वालों को मिले पद, निष्ठावानों को मिला डिमोशन’
इस्तीफा देने वाले नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेताओं का कहना है कि नई कार्यकारिणी में केवल चंद नेताओं की गणेश परिक्रमा और चापलूसी करने वालों को ही तवज्जो दी गई है। ऐसे लोगों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंप दी गईं, जिनका संगठन में या तो कोई योगदान नहीं रहा या पूर्व में पदों पर रहते हुए जिनकी उपलब्धि शून्य रही।
नेताओं ने साफ किया कि पिछली कार्यकारिणी की तुलना में इस बार उनके पदों को घटाकर उनका डिमोशन किया गया है, जो उनके आत्मसम्मान और स्वाभिमान के खिलाफ है।
जानिए किस नेता ने क्या कहा:
बलविंदर सिंह बिल्लू (पूर्व उपाध्यक्ष, वर्तमान महासचिव पद से इस्तीफा):
“पिछली कार्यकारिणी में मैं उपाध्यक्ष पद पर संगठन की सेवा कर रहा था। नई सूची में मेरा पद घटाकर मुझे महासचिव बना दिया गया। लंबे समय तक निष्ठापूर्वक काम करने के बाद यह फैसला असहज और डिमोशन जैसा है। मुझे पद की लालसा नहीं है, लेकिन यह स्थिति मेरे आत्मसम्मान के खिलाफ है।”
धर्मा गौचर (पूर्व महासचिव, वर्तमान सचिव पद से इस्तीफा):
“मैं पूर्व में जिला कांग्रेस कमेटी में महासचिव पद पर था। नई कार्यकारिणी में मुझे डिमोट करके सचिव बना दिया गया। संगठन द्वारा पूर्व में दिए गए सम्मान के लिए आभारी हूं, लेकिन यह निर्णय स्वाभिमान को ठेस पहुंचाता है।”
राजू पहाड़िया (पूर्व महासचिव, वर्तमान सचिव पद से इस्तीफा):
“वर्षों की निष्ठावान सेवा के बाद महासचिव से सचिव पद पर लाया जाना स्पष्ट रूप से डिमोशन है। यह स्थिति मेरे स्वाभिमान के विपरीत है, इसलिए त्यागपत्र दे रहा हूं।”
आगामी निकाय चुनाव पर गहराया संकट
स्थानीय निकाय और नगर निगम चुनावों से ठीक पहले पार्टी में उठी इस बगावत ने निचले स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ दिया है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने समय रहते इस असंतोष को काबू में नहीं किया और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी दूर नहीं की, तो चुनाव में पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें जयपुर स्थित प्रदेश आलाकमान पर टिकी हैं कि वे कोटा कांग्रेस के इस बवंडर को कैसे शांत करते हैं।