भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र आज भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन प्रदेश में गहराए खाद संकट और किसानों की समस्याओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे आगामी दिनों में भी सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के स्पष्ट संकेत मिल गए हैं।
शिवराज और मोहन यादव के मुखौटे लगाकर पहुंचे कांग्रेसी विधायक
सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विधानसभा परिसर का माहौल गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के चेहरे के मुखौटे पहनकर पहुंचे। विधायकों ने विधानसभा परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने धरना दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री दोनों मिलकर केवल ‘फाइल-फाइल’ का खेल खेल रहे हैं, जबकि जमीन पर किसान खाद और बीज के लिए दर-दर भटक रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में किसानों को खाद देने के बजाय केवल टोकन और ओटीपी का खेल खिलाकर परेशान किया जा रहा है।
खाद की कालाबाजारी और मनमाने दामों पर बिक्री के आरोप
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने खाद वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार कालाबाजारी रोकने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के किसानों को मजबूरी में 266 रुपये की खाद की बोरी 500 रुपये में और 1,350 रुपये की बोरी 2 हजार रुपये तक की ब्लैक मार्केट में खरीदनी पड़ रही है। मूंग, गेहूं और सोयाबीन उत्पादक किसान इस समय सबसे ज्यादा संकट में हैं।
यूसीसी के मसौदे पर भी बढ़ेगी रार
रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता के मसौदे को मंजूरी मिलने के बाद इस सत्र में इस विधेयक को पेश किया जाना है, जिस पर अभी से सियासत तेज हो गई है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सरकार मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने और उनके साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने के लिए यूसीसी लाना चाहती है, लेकिन कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति के तहत इसका विरोध कर रही है। वहीं, विपक्ष की ओर से फूल सिंह बरैया ने पलटवार करते हुए कहा कि जब तक नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता नहीं मिलती, तब तक यूसीसी लागू करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को वैधता देने के प्रावधानों को भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया।
दिवंगतों को श्रद्धांजलि के बाद 10 मिनट स्थगित रही कार्यवाही
इससे पहले, मानसून सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विभिन्न क्षेत्रों की दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूर्व विधायक अविश्वन जोशी, पूर्व विधायक पहाड़ सिंह कनौजे, पूर्व केंद्रीय मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बी.सी. खंडूरी, प्रसिद्ध शायर डॉ. बशीर बद्र और पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। सदन ने दिवंगत आत्माओं के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा, जिसके बाद विधानसभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने किसानों के मुद्दे पर हंगामा जारी रखा और विरोध स्वरूप सदन से बाहर चले गए।
इन मुद्दों पर भी घिरेगी सरकार, सत्ता पक्ष ने भी कसी कमर
विधानसभा सचिवालय के अनुसार, इस पांच दिवसीय सत्र के लिए अब तक रिकॉर्ड 1,756 प्रश्न (900 तारांकित और 856 अतारांकित) प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा 267 ध्यानाकर्षण और 5 स्थगन प्रस्ताव भी आए हैं। कांग्रेस आने वाले दिनों में उज्जैन भूमि खरीद प्रकरण, केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों को मुआवजा, नीट-यूजी पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी। वहीं, दूसरी ओर सरकार की तरफ से कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में खाद की कोई कमी नहीं है और पारदर्शिता के लिए टोकन व्यवस्था के तहत सुचारू रूप से वितरण किया जा रहा है। भाजपा विधायकों का कहना है कि कांग्रेस केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए नौटंकी और प्रदर्शन का सहारा ले रही है।