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डीएमएफ फंड पर सियासी घमासान: सांसद-विधायकों ने अधिकारियों से पूछा—बिना अनुमति कैसे हुए काम?

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गरियाबंद

जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) समिति की बैठक सोमवार को लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुई, लेकिन शुरुआत से ही माहौल गरमा गया। अफसरों द्वारा पिछली कार्ययोजना का एजेंडा प्रस्तुत किया जा रहा था कि इसी दौरान सांसद रूप कुमारी चौधरी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बैठक में नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अफसरों पर आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना कार्य आबंटन किया जा रहा है। सांसद ने बैठक में यहां तक पूछ लिया कि जिन कार्यों को स्वीकृति दी गई, वे आखिर किस समिति के अनुमोदन से पारित हुए। उनके तेवर देख बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

भाजपा विधायक रोहित साहू भी इस मुद्दे पर मुखर नजर आए। उन्होंने पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रस्तावित व्यवस्थाओं की अनदेखी पर नाराजगी जताई। विधायक ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में बोर खनन के लिए 500 फीट खुदाई बताई जा रही है, जबकि कई स्थानों पर 700 फीट से अधिक खुदाई की आवश्यकता है। भारी क्षमता वाली मशीनें लगाने की मांग भी अनसुनी की गई, जिससे पेयजल समस्या जस की तस बनी हुई है।

जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर ने भी आदिवासी बहुल गांवों की सड़क और पुल कनेक्टिविटी की मांगों की अनदेखी का मुद्दा उठाया। बैठक में कलेक्टर भगवान सिंह उइके, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। जनप्रतिनिधियों की तीखी प्रतिक्रिया के बीच बैठक का माहौल असहज हो गया।

सूत्रों के मुताबिक, डीएमएफ के लगभग 22 करोड़ रुपये के बजट में से अब तक करीब 7 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत और निष्पादित किए जा चुके हैं। इनमें बोर खनन, शौचालय निर्माण, स्प्रिंकलर और पावर स्पेयर जैसे कार्य शामिल हैं। आरोप यह भी है कि जेम पोर्टल की आड़ में कुछ बड़े कार्यों की मंजूरी और आवंटन में प्रभावशाली हस्तक्षेप रहा, जबकि समिति सदस्यों की प्राथमिकताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिला।

हालांकि जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने स्वीकार किया कि जनप्रतिनिधियों की मांग के अनुरूप कार्यों को मंजूरी नहीं मिलने से नाराजगी की स्थिति बनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में अब तक इस मद से कोई नया कार्य स्वीकृत नहीं हुआ है। बजट शेष है और आगामी दिनों में मांग के अनुरूप कार्यों को स्वीकृति देने की बात कही गई है।

कलेक्टर भगवान सिंह उइके से पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। वहीं सांसद रूप कुमारी चौधरी की प्रतिक्रिया के लिए भी प्रयास किए गए, परंतु उनका जवाब नहीं आया। उनके निज सहायक सौम्य रंजन ने अधिकृत मीडिया प्रभारी के माध्यम से प्रेस नोट जारी करने की बात कही है।

होली से ठीक पहले जिला पंचायत सभागार में उठे इस हंगामे ने डीएमएफ फंड के उपयोग और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के बाद कार्य अनुमोदन सूची में किस प्रकार के बदलाव किए जाते हैं।

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